कहानी भारत की : पुरातात्विक विरासत
इसकी शुरुआत निश्चित रूप से 1920 मे नहीं हुई थी जब हड़प्पा नामक जगह से पहले पहल खुदाई की गई और एक परिपाटी के अनुसार एक सभ्यता का नाम ‘हड़प्पा सभ्यता’ दे दिया गया। फिर जब इससे जुड़े स्थलों का भौगोलिक रूप से विस्तार हुआ तो उसे ‘सिंधु घाटी की सभ्यता’ नाम दिया गया। फिर जब एक सभ्यता ढूंढ ली गई तो उसके पतन के कारणों को भी ढूँढना था, औपनिवेशिक शासन के निर्देशन में एक नैरेटिव (Narrative) तैयार किया गया और कहा गया की “आर्य आक्रमणों’ के कारण इस सभ्यता का विनाश हुआ है और इस तरह है उतार बनाम दक्षिण का एक फॉल्टलाइन (Faultline) तैयार किया गए जिसके अन्य पक्ष यह रहे है दक्षिण भारत ही भारत के मूल निवासी है और दक्षिण भारतीय ही वास्तव में भारतीय सभ्यता के विरासत के अधिकारी है और उत्तर भारत आक्रमणकारी आर्यों की संतान है। हम इस सनातन की अपौरुषेय पक्ष की यात्रा हम सम्पूर्ण भारत नहर में पाए गए पुरातात्विक स्रोतों से प्रारंभ करते है जीने पूरा-इतिहास (pre history) कहा जाता है क्योंकि इतिहास के इस चरण में कोई लिखित साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो सके है जो पठनीय हो। लेखन के इस परंपरा के अनुसार जिस चरण में हमारे पास पठनीय स...