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Showing posts from May, 2025

कहानी भारत की : पुरातात्विक विरासत

इसकी शुरुआत निश्चित रूप से 1920 मे नहीं हुई थी जब हड़प्पा नामक जगह से पहले पहल खुदाई की गई और एक परिपाटी के अनुसार एक सभ्यता का नाम ‘हड़प्पा सभ्यता’ दे दिया गया। फिर जब इससे जुड़े स्थलों का भौगोलिक रूप से विस्तार हुआ तो उसे ‘सिंधु घाटी की सभ्यता’ नाम दिया गया। फिर जब एक सभ्यता ढूंढ ली गई तो उसके पतन के कारणों को भी ढूँढना था, औपनिवेशिक शासन के निर्देशन में एक नैरेटिव (Narrative) तैयार किया गया और कहा गया की “आर्य आक्रमणों’ के कारण इस सभ्यता का विनाश हुआ है और इस तरह है उतार बनाम दक्षिण का एक फॉल्टलाइन (Faultline) तैयार किया गए जिसके अन्य पक्ष यह रहे है दक्षिण भारत ही भारत के मूल निवासी है और दक्षिण भारतीय ही वास्तव में भारतीय सभ्यता के विरासत के अधिकारी है और उत्तर भारत आक्रमणकारी आर्यों की संतान है। हम इस सनातन की अपौरुषेय पक्ष की यात्रा हम सम्पूर्ण भारत नहर में पाए गए पुरातात्विक स्रोतों से प्रारंभ करते है जीने पूरा-इतिहास (pre history) कहा जाता है क्योंकि इतिहास के इस चरण में कोई लिखित साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो सके है जो पठनीय हो। लेखन के इस परंपरा के अनुसार जिस चरण में हमारे पास पठनीय स...

कहानी भारत की : भूमिका

भारत कहानी की शुरुआत कम से कम 10000 वर्ष पहले शुरू होती है जब पाकिस्तान, अफगानिस्तान सहित भारत के पश्चिमी भागों में एक नदी बहती थी जिसे ऋग्वेद ने सरस्वती कहकर पुकारा है। भूगर्भशास्त्र और हिमालयी अध्ययन यह प्रमाणित करते है की सरस्वती का जीवन-अवधि कम से कम 80000 ईसा पूर्व से लेकन 2000 ईसा पूर्व तक था जब यह पूरी तरह सुख गई। तब के सरस्वती का यह किनारा ही भारत के पहले सभ्यता की स्थापना, उत्थान और पतन का गवाह बनी। क्योंकि जीवन अनुकूल परिस्थितियों की उपस्थिति ने ही पहले पहल सरस्वती सहित ने समकालीन नदियों के किनारे सभ्यता के विकास को संभव बनाया था, इससे जुड़े लोगों ने सरस्वती को नदीतीमा कह कर संबोधित किया और उसकी खूब प्रशंसा की। यह सरस्वती ही थी जिसने जिसने इसके किनारे बसे समूहों का आरंभिक व्यवस्था के सामाजिक, आर्थिक एवं नैतिक मूल्यों को निर्णीत करने में एक महती भूमिका का निर्वहन किया था, उस मानव सभया का पहला आधिकारिक ग्रंथ ऋग्वेद सरस्वती नदी की महिमा, उसके आवेगों और उसके द्वारा प्रवाहित जल की मात्रा एवं प्रकृति सहित उससे उत्पन्न सौन्दर्य बोध का खूब वर्णन किया है। इस तरह से सरस्वती नदी का तट ही...