हिंदू नहीं जनधर्म : सनातन का सही नाम
भूमिका एक शब्द किसी सभ्यता की पहचान बन जाता है। पर हर शब्द उस सभ्यता से नहीं जन्मता। हिंदू शब्द ऐसा ही एक नाम है। यह शब्द भारत के बाहर से आया। इसका मूल स्रोत फारसी भाषा में है। शुरू में यह किसी धर्म का नाम नहीं था। यह केवल एक भौगोलिक पहचान थी जो हिन्दुकुश से सन्दर्भित थी। बाद में इस्लामी आक्रांताओं ने इसे एक धार्मिक दुराग्रह से जोड़ दिया। असली सत्य कहीं और है। भारत की सभ्यता का मूल गुण सनातन है। सनातन का अर्थ है जो सदा से है। जो न कभी बना और न कभी मिटेगा। यह गुण किसी बाहरी शासक की देन नहीं है। यह वैदिक काल से चला आ रहा है। पर सनातन प्रकृति वाले धर्म को सही रूप से समझने के लिए एक और शब्द जरूरी है। वह शब्द है जनधर्म। यह लेख इसी विचार को खोलने का प्रयास है। हम देखेंगे कि ऋग्वेद में जन शब्द का क्या अर्थ था। हम देखेंगे कि धर्म कैसे जन से जुड़ा। और अंत में गीता के एक महत्वपूर्ण श्लोक से यह समझेंगे कि लोकाचार कैसे धर्म बनता है। हिंदू शब्द बाहर से आया हिंदू शब्द की जड़ फारसी भाषा में है। जब ईरानी और अरब यात्री भारत आए तो उन्होंने सिंधु नदी को हिंदु कहा। फारसी में स ध्वनि अक्सर ह में बदल जाती ह...