वैलंटाईन वाला प्रेम
फ़रवरी में ढूँढते है लोग,
वैलेंटाइंस पर तेरे इश्क़ का रंग
मैं पूजारी शिव का
मूँद नयन, ढूँढ रहा बस तेरा संग
अब आओ तो कुछ बात बने
बेलपत्र सजे, फूल सजे और सजे मन मेरा
पी लूँ शिव सदृश्य विष प्रेम का
नीलकंठ बन शृंगार करूं, मन मगन हो तेरा
इश्क घुले लहू में अपना
सुन डमरू की धुन नृत्य करूं
त्रिशूल उठा लूँ, जग से लड़ने
प्रियतम, बस प्रेम ही मेरा धर्म बने
दधीचि सा समर्पण हो मेरा
पर मुक्ति मेरी चाह नहीं,
बंध जाऊँ प्रिय तेरे प्रेम पाश में
जग कहे कुछ भी, वह कोई बात नहीं
Comments