माओवादी हिंसा की बौद्धिक खादपानी
18 नवंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के घने जंगलों में सुरक्षा बलों ने माओवादी कमांडर माडवी हिडमा को घेराबंदी के बाद मार गिराया। इससे पहले मई में छत्तीसगढ़ में महासचिव बसवराजु भी ढेर हो गया। दशक भर की कार्रवाई से नक्सली घटनाएँ 53% घटीं, प्रभावित जिले 126 से घटकर 3-4 रह गए। यह सब पुलिस की सफलता है जो उत्साही है लेकिन विचारधारात्मक जड़ें बाकी हैं। इन्हें न काटा तो उन्मूलन अधूरा रहेगा। इसका मूल कारण यह है की शिक्षित बुद्धिजीवियों ने नक्सलवाद को रोमांटिक बनाकर जिंदा रखा और उसे अपना वैचारिक समर्थन दिया है। भारतीय नक्सलवाद को बनाए रखने, वैचारिक रूप से पोषित करने और उसका रोमानीकरण करने में शिक्षित उच्चवर्गीय बुद्धिजीवियों की भूमिका, भारत की आंतरिक सुरक्षा बहस में लंबे समय तक उपेक्षित रही है। जब तक नक्सलवाद की वैचारिक और बौद्धिक जड़ें अक्षुण्ण हैं, तब तक इसका पूर्ण उन्मूलन संभव नहीं है। माओवादी हिंसा की बुनयादी समझ माओवाद, माओ त्से तुंग द्वारा विकसित साम्यवाद का एक रूप है। यह सशस्त्र विद्रोह, जन लामबंदी और रणनीतिक गठबंधनों के संयोजन के माध्यम से सत्ता पर कब्जा करने का सिद्धांत है। माओवादी अपने विद्रो...