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उपनिवेशवाद पर जेम्स मिल (James Mill) की History of British India का बौद्धिक और वैचारिक प्रभाव

जेम्स मिल और History of British India जेम्स मिल ने ब्रिटिश भारत का इतिहास लिखने में लगभग 12 वर्ष (लगभग 1806–1818) लगाए, और यह कृति 1817 में तीन खंडों में प्रकाशित हुई। इस ग्रंथ ने उन्हें ईस्ट इंडिया कंपनी में एक उच्च पद दिलाया, जिसे वे लगभग 17 वर्षों तक संभालते रहे। मिल भारत कभी नहीं आए थे, न ही उन्होंने भारतीय भाषाएँ सीखी थीं, फिर भी उन्होंने स्वयं को इस विषय का निष्पक्ष विश्लेषक बताया।  जेम्स मिल की रचना ब्रिटिश औपनिवेशिक विचार की वैचारिक नींव बन गई। उन्होंने भारत को “सभ्यता के पैमाने पर निम्नतर” और ब्रिटिश शासन को “नैतिक रूप से आवश्यक” सिद्ध किया।  उनकी यह दृष्टि इतिहास, अर्थशास्त्र और उपयोगितावादी दर्शन का मिश्रण थी — जिसने औपनिवेशिक प्रशासन में नैतिक औचित्य का रूप धारण किया। 2. दार्शनिक (Philosophical) इतिहास की रूपरेखा यह कृति स्कॉटिश एनलाइटनमेंट (Scottish Enlightenment) के प्रभाव में रची गई थी। मिल का उद्देश्य “मानव सभ्यता की प्रगति के प्राकृतिक नियमों” को उजागर करना था — केवल घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि उनके नैतिक और तर्कसंगत अर्थ को बताना। उन्होंने इतिहास को एक “आलोच...

ऋग्वेद का ऐतिहासिक विमर्श : नगरीय (सिंधु सरस्वती सभ्यता) और ग्रामीण भारत की साझी बौद्धिक विरासत

पुरातत्व विज्ञान की एक परिपाटी है जिसके अनुसार किसी सभ्यता का नामकरण उससे जुड़े स्थलों में से पहले पहल मिले स्थल के नाम पर किया जाता है। क्योंकि हड़प्पा जिसे पहले सिंधु घाटी सभ्यता और फिर सिंधु सभ्यता कहा जाने लगा, इस सभ्यता से जुड़े अवशेषों की पहली आधिकारिक खोज थी, पुरातत्व की परिपाटी के अनुसार हड़प्पा सभ्यता कहलाती है। इसके बाद वर्ष 1926 में माधव स्वरुप व 1946 में आर.ई.एम. व्हीलर और आगे अन्य पुरातत्वविदों द्वारा भी खुदाई होती रही। 1930 के दशक में अन्य स्थलों जैसे—मोहनजोदड़ो (1922), धोलावीरा, कालीबंगा, राखीगढ़ी की भी खुदाई शुरू हुई। तब उस समय इनकी लिपि अपठनीय रही थी और फिर 'मोहनजोदड़ो' जैसे स्थल सिंधु नदी के किनारे बसे थे; इसलिए इसे 'सिंधु घाटी सभ्यता' कहा गया। लेकिन समय के साथ खुदाई में ऐसे स्थल (जैसे कालीबंगा, राखीगढ़ी, बनावली, धोलावीरा आदि) भी मिले जो ऋग्वेद मे वर्णित सरस्वती नदी (या घग्घर-हकड़ा) के किनारे थे, तो इतिहासकारों और पुरातत्वविदों ने इसे 'सिंधु-सरस्वती घाटी सभ्यता' कहना शुरू किया, ताकि इसके पूरे फैलाव और सभी स्थलों का उल्लेख हो सके। वर्तमान में इस सभ...

स्कूली शिक्षा : परिदृश्य और बदलाव की आवश्यकता

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जिसे हम आज आधुनिक शिक्षा कहते है, वह मोटे तौर पर स्कूली शिक्षा है जो स्वयं में "प्रशियाई शिक्षा प्रणाली" (Prussian education system) का विस्तार है लेकिन एक बदले हुए उद्देश्य के साथ। लगभग 18वीं शताब्दी के अंत और 19वीं शताब्दी की शुरुआत में यह राज्य की एक दीर्घकालीन नीति के रूप में अपनी महत्ता स्थापित कर ली थी। यह अनिवार्य बुनियादी शिक्षा पर आधारित थी। जिसका उद्देश्य एक अनुशासित और राज्य समर्पित नागरिक बनाना था। 1800 के दशक में नेपोलियन युद्धों इसे और मजबूती प्रदान की। अब सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा बना दी गई। यह मानकीकृत पाठ्यक्रम और समय-सारणी पर जोर देता था। छात्रों को अनुशासन, आज्ञाकारिता और राष्ट्रभक्ति सिखाना इसके केंद्र में था। लेकिन इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी की यह मॉडेल रचनात्मक चिंतन (critical thinking) के स्थान पर एक यह मानकर चलता था की मानव को समयबद्ध तरीके से प्रशिक्षित कर उसे बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है ताकि वह राज्य के निमित्त उत्पादन और उपभोग सहित समर्पित सेना की आपूर्ति की एक इकाई बन कर रह जाए। एक पूंजीवादी मॉडेल जो की ...

सनातन विश्वास प्रणाली का गणितीय आधार

संख्याएं सिर्फ गणित नहीं होती, यह विज्ञान का आधार भी होती है। जहां विज्ञान होता है वही सभ्यता होती है और जहां सभ्यता होती है संस्कृति अपने आप होगी। इस तरह से सभ्यता और संस्कृति की ऐतिहासिक विरासत, अंकों और संख्यायों के अनुप्रयोग और अवधारणाओं पर ही निर्भर करती है। जब तक मापन का गणित नहीं होगा, किसी भी सभ्यता और संस्कृति में वाणिज्य और व्यापार की कल्पना भी संभव नहीं। सिंधु- सरस्वती नदी घाटी सभ्यता के नगरीय अवशेष बिना ईंटों के गणितीय मापन के बिना संभव ही नहीं थे।  उपर्युक्त भौतिक प्रादर्शो के अनुरूप ही भारत की दार्शनिक परंपरा इस अर्थ मे काफी समृद्ध रही की इससे जुड़े लगभग सारे प्रतीक किसी न किसी रूप से अंकीय गणनाओं/अनुप्रयोगों से जुड़े रहे हैं। अलग अलग अंकों से जुड़ी इसके धार्मिक जीवन के विभिन्न लोकाचार एक ऐसा सुंदर चित्र प्रस्तुत करती है जो इसकी श्रेष्ठता को तो बताते ही है अखिल ब्रह्मांड के साथ एकात्मकता का बोध करती है। सनातन की विश्वास प्रणाली में कुछ भी रहेटऑरिक नहीं है। यहाँ के हर विचार को अंकीय संदर्भों में व्यक्त किया गया है और तभी यह वैज्ञानिक है और समय के साथ खड़ा उतरा है।  शू...